• आंधी और तूफ़ान और हम

    महीने भर से खबरों में मोदी जी की जगह आंधी और तूफ़ान ने ले रखी है | कभी यहाँ तूफ़ान आया कभी वहां आंधी आई कभी भारी बारिश , कभी चक्रवात आदि | दुःख तब होता है जब ईएसआई आपदा में लोग जान गंवाते है |आज २१वीं सदी में हमने चाहे जितनी तरक्की कर ली हो, मंगल पर यान भेज कर हम अन्तरिक्ष विजय के भ्रम में अपना सीना चौड़ा करते घूम रहे हो , अब ऐसी प्राकृतिक आपदाएं पल भर में हमे अपनी औकात दिखा देती है |


    मौसम विभाग ने उत्तर भारत के कई राज्यों में 7 से 10 मई के बीच तूफान और गरज के साथ बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी दी है. मौसम विभाग की चेतावनी से लोग जरूरत से ज्यादा डर गए हैं क्योंकि 2 मई को आए आंधी-तूफान ने राजस्थान और उत्तर प्रदेश समेत कई इलाकों में 120 से ज्यादा लोगों की जान ले ली थी.


    आंधी तूफान के बारे में मौसम विभाग की चेतावनी के साथ ही एक वीडियो तेजी से वायरल होने लगा जिसमें यह दिखाया गया है कि राजस्थान के बीकानेर या बाड़मेर में धूल भरी भयंकर आंधी की शुरुआत हो चुकी है जो पूरे उत्तर भारत को अपनी चपेट में लेने जा रहा है. इस वीडियो को कई लोग वॉट्सऐप और सोशल मीडिया के जरिए शेयर करने लग गए हैं. मैं खुद राजस्थान के शेखावाटी प्रदेश का निवासी हूँ इसलिए ये खबरे पढ़ कर डर भी लगता है |


    आइये थोडा इन आपदाओं के कारणों बारे में जान लेते हैं | 


    तूफ़ान या आँधी पृथ्वी या किसी अन्य ग्रह के वायुमंडल में उत्तेजना की स्थिति को कहते हैं जो अक्सर सख़्त मौसम के साथ आती है। इसमें तेज़ हवाएँ, ओले गिरना, भारी बारिश, भारी बर्फ़बारी, बादलों का चमकना और बिजली का चमकना जैसे मौसमी गतिविधियाँ दिखती हैं। आमतौर पर तूफ़ान आने से साधारण जीवन पर बुरा असर पड़ता है। यातायात और अन्य दैनिक क्रियाओं के अलावा, बाढ़ आने, बिजली गिरने और हिमपात से जान व माल की हानि भी हो सकती है।रेगिस्तान जैसे शुष्क क्षेत्रों में रेतीले तूफ़ान और समुद्रों में ऊँची लहरों जैसी ख़तरनाक स्थितियाँ भी पैदा हो सकती हैं। इसके विपरीत बारिश व हिमपात से कुछ इलाक़ों में सूखे की समस्या में मदद भी मिल सकती है। मौसम-वैज्ञानिक अनुमान लगाते हैं कि हर साल पृथ्वी पर लगभग 1.6 करोड़ गरज-चमक वाले तूफ़ान आते हैं।


    मौसम विज्ञानियों की मानें तो ठंडी हवाओं का तूफान का रूप लेने के पीछे वजह 'डाउनबर्स्‍ट' है, यानि हवा चलने के दौरान डाउनवर्ड एयर मूवमेंट उसे तूफान में तब्‍दील कर देता है. इस दौरान 100 किमी प्रति घंटे या उससे अधिक की रफ्तार से हवा चलती है. जब डाउनवर्ड हवा जमीन से टकराती है तो वह बाहर की तरफ धक्‍का मारती है. किसानों को अकसर इससे संघर्ष करते देखा गया है. हवा का यह मूवमेंट 200 मील तक रहता है. हालांकि कुछ थोड़ी दूर में ही शांत हो जाती हैं. जो डाउनबर्स्‍ट ढाई मील से छोटे होते हैं उन्‍हें 'माइक्रोबर्स्‍ट' कहते हैं. इसमें हवा में मिट्टी का शामिल होना और बड़ी तबाही का कारण बनता है. ऐसा मंजर गर्म प्रदेशों में ज्‍यादा देखने को मिलता है, जहां का तापमान 40 डिग्री से ऊपर रहता है. इस दौरान विजिबिलटी शून्‍य हो जाती है. आंखों से दिखना बंद हो जाता है. जब यह हवा किसी दीवार या इमारत से टकराती है तो उसके गिरने से तबाही का मंजर और भयावह हो जाता है.


    मैं पाठको को इसमें रखनी वाली सावधानियां भी बताना चाहूँगा -

    सावधानियाँ एवं उपाय
    तूफ़ान आने के पहले 
    एक घरेलू आपातकालीन योजना तैयार करें। 
    अपने घर में अपने आपातकालीन बचाव वस्‍तुएं और एक साथ ले जाने योग्‍य गेटअवे किट (बचाव किट) व्‍यवस्थित करें और इनका सही रखरखाव बनाए रखें। 
    अपनी संपत्ति को इस प्रकार व्‍यवस्थित करें कि वह तेज पवनों को सामना कर सके। विशाल भारी वस्‍तुओं को मज़बूती से लगा कर रखें या किसी भी ऐसे सामान को हटा दें जो गिरने पर जानलेवा या हानिकारक साबित हो सकता हो। 
    इस बात की पुष्टि के लिए कि आपके घर की छत सुरक्षित है, नियमित रूप से उसकी जांच करते रहें। ऐसी वस्‍तुओं की सूची बना लें, जिन्‍हे बचाना ज़रूरी हो या शक्तिशाली पवनों के पूर्वानुमान पर उन्‍हें अन्‍दर रख दें। 
    खिड़कियों की मरम्‍मत के लिए तिरपाल, बोर्ड और डक्‍ट टेप जैसे सामानों को आसान पहुंच में रखें।
    यदि खेती करते हैं, तो यह पता कर लें कि पशुधन के लिए कौन सा बाड़ा, बाढ़ के पानी, भूस्खलनऔर बिजली की लाइनों से सुरक्षित है। 
    जब चेतावनी जारी हो गई हो और तूफ़ान के दौरान


    मौसम के बारे में नवीनतम जानकारी प्राप्‍त करते रहें। अपने स्‍थानीय रेडियो केन्‍द्र का प्रसारण सुनें क्‍योंकि आपके समुदाय और स्थिति के लिए नागरिक प्रतिरक्षा प्राधिकारी सबसे उपयुक्‍त सलाह का प्रसारण करेंगे। 
    अपनी घरेलू आपातकालीन योजना पर कार्यवाही करें और यदि आपको जल्दी में जगह छोड़ कर निकलना पड़े, उसके लिए अपनी गेटअवे (बचाव) किट जांचें। 
    सभी ऐसी वस्‍तुओं को मज़बूती से बांध दे या घर के अन्‍दर कर दें, जिनमें आग लग सकती हो और जो तेज हवा चलते समय हानिकारक साबित हो सकती हों। 
    खिड़कियां, बाहरी व भीतरी दरवाज़े बंद कर दें। चकनाचूर कांच या उड़ती किरचों से होने वाली क्षति से बचने के लिए असुरक्षित कांच पर पर्दा डाल दें। 
    यदि पवन विनाशकारी बन जाए, तो दरवाजों और खिड़कियों से दूर रहें और घर के अन्‍दर ही आश्रय लें। 
    पानी की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है इसीलिए पीने के पानी को बर्तनों में स्‍टोर करना और बाथटब और सिंकों को पानी से भरना एक अच्‍छा उपाय है। 
    घर के बाहर न घूमें और ड्राइविंग करने से बचें जब तक कि ऐसा करना बहुत ही ज़रूरी न हो। 
    खराब मौसम की वजह से बिजली की आपूर्ति बंद हो सकती है। तीव्र बिजली प्रवाह से क्षति पहुंचने से रोकने के लिए छोटे उपकरणों के प्‍लग निकाल दें। यदि बिजली चली जाए तो बिजली की आपूर्ति फिर से चालू होने पर तीव्र बिजली प्रवाह से होने वाली क्षति को कम करने के लिए बड़े उपकरणों के प्लग निकाल दें। 
    पालतू पशुओं को घर के अन्‍दर कर लें। पशुधन को उनके आश्रय पर पहुंचा दें। यदि आपको स्‍थान छोड़कर बचकर निकलना हो तो पालतू पशुओं को अपने साथ ले जाएं। 



    प्राकृतिक आपदाएँ कभी भी बताकर नहीं आतीं। न ही प्रकृति से परे कुछ है ? समूचा मानवीय विज्ञान कुदरत के एक हल्के से धक्के पर स्तब्ध हो खड़ा देखने को विवश रहता है। आपदा के उपरान्त ज़िम्मेदारियाँ तय की जाती हैं। पदों पर आसीन व्यक्ति कुछ योजनाओं और नीतियों पर बैठकें आयोजित करते हैं। काफी कुछ किये जाने के मंतव्य सुनिश्चित किये जाते हैं। सिर्फ नहीं किया जाता तो यह की हम प्रकृति और अपनी पृथ्वी के साथ अपने रिश्तों के तानों-बानों को गहनता से बुनने की सोचें। पूरी दुनिया कुदरती कहर के सामने बौनी साबित होती है और होती भी रहेगी। इन आपदाओं से पूर्णरूपेण उबरा नहीं जा सकता। हाँ इन आपदाओं के प्रभाव और परिणामों में कमी अवश्य लायी जा सकती है।
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